Monday, 10 December 2012

SARWAGYA: अनुभवी समाधान नमस्कार दोस्तों , आज से मै  आप से...

SARWAGYA: अनुभवी समाधान

नमस्कार
दोस्तों , आज से मै  आप से...
: अनुभवी समाधान  नमस्कार  दोस्तों ,  आज से मै  आप से जुड़ रहा हूँ , आशा है आप का प्यार और आशीर्वाद मुझे प्राप्त होगा  मै आप की ...

Sunday, 2 December 2012

  सकारात्मक सोच 

एक राजा का  हाथी  एक बार गहरे दलदल  में फंस  गया। उस के मन में निराशा का भाव आ गया कि  वह अब दलदल  से बाहर  नहीं आ सकता और यही मर जायेगा। वो छटपटा कर दलदल से बाहर  आने की बहुत कोशिश करता ,लेकिन निराशा की सोच के कारण उसका प्रयास कमजोर होता और वो बाहर  आने की बजाये दलदल  में और फंसता जा रहा था।  

तभी वहां से एक साधू गुजरे। उन्होंने सारा नज़ारा देखा। उन्होंने वहां एकत्र लोगो से कहा  कि यहाँ सकारात्मक वातावरण उत्पन्न करो तो यह हाथी दलदल से बाहर आ जायेगा।

 सभी एक दूसरे की ओर  देखने लगे कि सकारात्मक वातावरण कैसे उत्पन्न होगा।    साधू समझ गए कि   मुझे ही कुछ करना  होगा। उन्होंने कहा -- यहाँ ढोल नगाड़े बजाओ , ढोल नगाडो की आवाज सुन कर के हाथी ने सोचा कि राजा की सवारी  निकलने वाली  है , शाही सवारी में  शामिल होने के लिए उस के अन्दर जोश आ गया और उसने जोर की छलांग लगाई, दलदल से थोडा बाहर  आया पर अभी भी फंसा हुआ था। साधू ने कहा अब कुछ सैनिको को बुलाओ , सैनिको को देख कर हाथी ने सोचा ,अब राजा साहब आने वाले हे, उसमें  और जोश आ गया, उसने एक और जोर की छलांग लगाई  और थोडा और बाहर आ गया। अब साधू ने कहा-- तुरही बजाओ और राजा   का जयघोष करो। जयघोष सुन कर हाथी ने सोचा कि अब तो  राजा राजा  साहब आ ही गए और मुझे उनके रथ   को ले कर जाना  हैं , उसमे और जोश आ गया और एक जोर की छलांग लगा कर बाहर  आ गया। 

बैंक में भी  प्रायः  ऐसा ही होता है । काम जब ज्यादा एकत्र हो जाता हैं  या लक्ष्यो की प्राप्ति नहीं    हो पाती या कोई और परेशानी होती है  तो हम निराश हो जाते हैं  और नकारात्मक सोच हमारे ऊपर हावी हो जाती है। यदि हम अपने आसपास सकारात्मक वातावरण उत्पन्न करे और आशावादी विचार मन मैं लाये तो उत्साह के साथ कार्य संपन्न कर सकते हैं।

एक बार दो आदमी एक कुए मैं गिर गए। कुआ बहुत  गहरा  था और उसमे से आज तक   कोई बाहर नहीं आया था। कुए के ऊपर बहुत  लोगो की भीड़  एकत्र हो गई। सभी शोर करने लगे,जोर जोर से कहने लगे --ये कुआ इतना गहरा  है, इसमें सांप हैं , इसमें से निकलना आसान नहीं है, फिर भी हम रस्सी डाल रहे हैं,; पकड़ने की कोशिश करो और ऊपर आ जाओ। दोनों में से   एक आदमी ने रस्सी पकड़ने की कोशिश की परन्तु पकड़ नहीं पाया  और कुए में नीचे गिर गया। परन्तु  दूसरा आदमी रस्सी को मजबूती से पकड़ कर कुए से बाहर आ गया।  क्योकि यह  आदमी बहरा था , उसने ऊपर खड़े लोगों की  कोई नकारात्मक और निराशावादी बात सुनी ही नहीं , बल्कि शोर करने वालो के हावभाव देख कर वो समझ रहा था कि ये लोग मुझे जोश दिला रहे हैं और ऊपर आने के लिए कह रहे हैं।

अच्छा करने और परेशानियों से उबरने की सम्भावनाये सदैव  बनी रहती  हैं। संतृप्ति का भाव  मन में  नहीं आना चाहिए।  कभी ये नहीं सोचना चाहिये   कि अब कुछ नहीं हो सकता। ऐसे  लोगो की  पाठशाला मैं एक   मनोविज्ञानी ने इस बात को बड़े ही प्रभावशाली ढंग से इस प्रकार समझाया --

उन्होंने एक  बड़ा सा मटका   लिया  और उसमे पत्थर के टुकड़े ऊपर तक भर दिए। सभी ने कहा अब इसमें कुछ नहीं आ सकता। उन्हों ने अब छोटे छोटे कांच के टुकड़े मटके मैं डाल दिए और बिलकूल ऊपर तक मटका फिर भर गया। अब तो सभी कहने लगे कि अब   कुछ नहीं आ सकता। मनोविज्ञानी ने अब उस मटके मैं रेत डाली , रेत भी मटके मैं पूरी तरह से समा गयी। छात्रो ने अब कह दिया  कि अब इसमें कुछ भी नहीं आ सकता। 

परन्तु मनोविज्ञानी ने अभी हार   नहीं मानी मानी  और कहा कि संतृप्ति का भाव मन मैं नहीं लाईये , अभी तो इसमें बहुत कुछ आ सकता हैं, बस ज़रा दिमाग लगाइए और  सोचिये। मनोविज्ञानी ने मटके मैं अब थोडा सा पानी डाला , पानी भी उसमें समा गया।  छात्रो ने सोच लिया कि अब तो कोई गुंजाईश ही नहीं  हैं। परन्तु मनोविज्ञानी मन ही मन मुस्करा  रहे थे। अब उन्होंने मटके मैं नमक डाला। नमक भी मटके मैं   समा  गया। मनोविज्ञानी ने छात्रो की ओर चमकती हुई नज़रो से देखा और  पूछा --अब ? सभी ने एक स्वर से कहा --अब इस में कुछ नहीं आ सकता। मनोविज्ञानी  ने   फूल की एक कली   को  तोडा  और लबालब भरे  मटके मैं ऊपर से लगा द़िया। 

                                        ****************************************************************              

                    

Saturday, 1 December 2012

अनुभवी समाधान 

नमस्कार 

दोस्तों , 
आज से मै  आप से जुड़ रहा हूँ , आशा है आप का प्यार और आशीर्वाद मुझे प्राप्त होगा 

मै आप की किसी भी प्रकार की समस्या के समाधान का उपाय अपने अनुभव के  पर बताऊंगा . मै  कोई पंडित ज्योतिषी या ज्ञाता नहीं हूँ,
परन्तु मैंने अपने अनुभव से जो सीखा है , हो सकता है वो आप के भी काम का हो .

इस के अतिरिक्त मेरे जो साहित्यिक राजनितिक विचार है वो भी आप के साथ शेयर करूंगा 

"सर्वज्ञ "